ऋतुओं में तुम श्रेष्ठ कहलाते हो पशु पक्षियों के संग खेलते हो क्या काम है तुम्हारा पूछते है हम तुम... ऋतुओं में तुम श्रेष्ठ कहलाते हो पशु पक्षियों के संग खेलते हो क्या काम है तुम्ह...
बहुत छोटी है न तेरी ये ज़िन्दगी बहुत छोटी है न तेरी ये ज़िन्दगी
मैं नदी, पहाड़ों से निकलती हूँ, जमीन पर कल कल बहती हूँ। मैं नदी, पहाड़ों से निकलती हूँ, जमीन पर कल कल बहती हूँ।
हां, मैं खुश हूँ सच्ची खुशी को पा गया। हां, मैं खुश हूँ सच्ची खुशी को पा गया।
कोई फर्क नहीं कर पाएगा, अंदर बाहर सब रंगों रंग हो जाएगा। कोई फर्क नहीं कर पाएगा, अंदर बाहर सब रंगों रंग हो जाएगा।
बस खामोशी के इस मंजर में वो मुकाम तो आने दे। बस खामोशी के इस मंजर में वो मुकाम तो आने दे।